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बहनों का सहारा बनी सरस्वती
11-May-2015
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सागर में रहने वाली सरस्वती पटेल का नाम अब मोहल्ले की महिलाओं की जुबां पर रहता है। वह दूसरी लड़कियों के लिए एक हौसला बन गई हैं। माता-पिता के गुजर जाने के बाद उन्होंने न केवल अपने परिवार को संभाला बल्कि अपनी बहनों की पढ़ाई को फिर से शुरू करवाया।

सागर शहर के तिलकगंज वार्ड में पटेल परिवार रहता है। आठ साल पहले इस परिवार पर उस वक्त कहर टूटा जब परिवार की तीन लड़कियों के सिर से बाप का साया उठ गया। किसी भी परिवार के मुखिया का चला जाना किसी त्रासदी से कम नहीं होता। की इस घड़ी में परिवार की गाड़ी मां ने संभाली, मेहनत मजदूरी करके लड़कियों को बड़ा किया। लेकिन 2012 में मां भी गुजर गयी। इसके बाद जिम्मेदारी बड़ी बहन सरस्वती पर आ गई। सरस्वती ने अपनी जिम्मेदारी को समझा और परिवार को संभाला। सिलाई करना और पापड़ बनाना सीखा। मोहल्ले के लोगों ने परिवार की दिक्कत को समझा तो मदद के लिए आगे आए। चंदा करके पैसे जमा किए और सरस्वती के लिए सिलाई मशीन खरीदी। धीरे-धीरे वह सिलाई करना भी सीख गई।

सरस्वती ने अपनी बहन संतोषी के साथ सखी सहेली का प्रशिक्षण किया। इसके बाद उन्होंने अपने वार्ड में ही किशोरी मंडल का गठन किया। इससे उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझा और उन्हें दूर करने के लिए अपनी ओर से जागरूकता लाने की कोशिश की। सरस्वती ने समझा कि किशोरी बालिकाओं की सबसे बड़ी समस्या खून की कमी है।

इसे दूर करने के लिए वह आंगनबाड़ी से जुड़ीं अब वह आंगनबाडी के कार्यो में प्रतिदिन सहयोग करनी है। यही नहीं खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने खुद ही और अच्छा काम करने की ठानी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी हुई तो अपनी 3 बहनों की रूकी हुई पढ़ाई फिर शुरू करवाई। उनका स्कूल में दाखिला करवाया। वह खुद भी बी.ए.आई की परीक्षा दे रही है। वह समुदाय की बालिकाओं को शिक्षा का महत्व बता रही है।

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