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प्रत्येक विकासखण्ड में बनेंगें न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज
23-Aug-2017
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भोपाल। हितग्राहियों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने, कृषि उत्पादों की विविधता तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कृषि उत्पादों की पहचान एवं जनसमुदाय के द्वारा उनके श्रेष्ठ उपयोग को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा पोषण जागरुकता, पोषण के लिये कृषि एवं कृषि जागरूकता की अवधारणा पर कार्य करना प्रारंभ किया गया है। इस हेतु विभाग द्वारा यह तय किया है कि प्रत्येक विकासखण्ड के कम से कम एक गांव को न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया जाए। इस दिशा में आगामी रणनीति तय करने के लिए भोपाल के विधानसभा परिसर में दिनांक 22 एवं 23 अगस्त 2017 को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला के प्रथम दिन शुभारंभ अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के मिशन से काम करें। संकल्प लें कि प्रदेश से कुपोषण के कलंक को दूर करेंगे। प्रदेश में इसके लिये संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से लक्ष्य को हासिल करेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहां न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। प्रदेश के सभी विकासखंडों में अगले एक वर्ष में एक-एक ग्राम को न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज बनाया जायेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश की विकास दर लगातार दहाई अंकों में है। कृषि विकास दर देश में सर्वाधिक है। प्रति व्यक्ति आय भी लगातार बढ़ रही है। विकास का लाभ आम आदमी तक जब तक नहीं पहुंचता तब तक विकास बेमानी है। विकास का लाभ गरीबों और बच्चों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना होगा। राज्य सरकार ने बच्चों के लिये कई योजनाएं बनायी हैं। मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा में दिक्कत नहीं आये, इसके लिये मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना बनायी है। बच्चे प्रदेश और देश का भविष्य हैं। बेहतर योजनाओं के साथ बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अधिकारियों से कहा कि वे अपने कार्य को मिशन मानकर काम करें। बच्चों और महिलाओं के विकास का काम पवित्र और महत्वपूर्ण है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारी को पुरस्कृत किया जायेगा। अपने प्रदेश को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदेश बनाने के लिये काम करें।

इस अवसर पर माननीय मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि प्रदेश के सभी 313 विकासखंडों में एक-एक न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज का चयन कर लिया गया है। इस बार बेहतर काम करने वालों को दीनदयाल पोषण पुरस्कार दिया जायेगा। प्रदेश की सभी आंगनबाड़ियों में पीने के पानी की व्यवस्था कर दी गई है। सभी आंगनबाड़ियों में सौर ऊर्जा से विद्युत व्यवस्था की जा रही है। आंगनबाड़ियों में सोया-दूध देने की व्यवस्था की जा रही है।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग श्री जे.एन. कांसोटिया ने कहा कि पीडीएस से खाद्य उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन क्या खाना चाहिए इस संबंध में चेतना का अभाव है। इसके लिए समाज को जागरुक किया जाना होगा। यह कार्य सबके सहयोग और समन्वय से ही हो सकता है। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान जबलपुर के संचालक श्री अनुपम मिश्र ने न्यूट्रिशन स्मार्ट विलेज की परिकल्पना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सात विभागों के समन्वय से इसे क्रियान्वित किया जायेगा। मध्यप्रदेश इसे शुरु करने वाला पहला प्रदेश है। कार्यक्रम के दौरान माननीय मुख्यमंत्रीजी ने आंगनबाड़ी हेल्प-डेस्क मोबाइल-एप का लोकार्पण भी किया किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा, आयुक्त एकीकृत बाल विकास सेवा श्रीमती पुष्पलता सिंह, आयुक्त महिला सशक्तिकरण श्रीमती जयश्री कियावत सहित महिला एवं बाल विकास, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यशाला के दूसरे दिन महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री जी, महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा कि माहवारी प्रबंधन के अंतर्गत सेनिटरी नेपकीन नष्ट करने के लिये मड इंसीनिरेटर के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये पूरे प्रदेश में प्रयास किये जा रहे हैं। उपयोग किये हुए सेनिटरी नेपकिन गंदगी तथा बीमारी फैलाने का एक प्रमुख कारण है। इनके किफायती निपटान के लिये मड इंसीनिरेटर बनाने तथा उनकी सहज उपलब्धता सुनिश्चत करने के लिये मॉटीकला बोर्ड से बातचीत की जा रही है और जिला स्तर पर कुम्हारों का पंजीयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस में महिलाओं के लिये आरक्षण के बाद महिलाओं के लिये पर्याप्त पद विद्यमान है। बालिकाओं को पुलिस भर्ती परीक्षा तथा फिजिकल फिटनेस संबंधी प्रशिक्षण के लिये विभाग द्वारा जिला स्तर पर व्यवस्था की जा रही है।

प्रमुख सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा कि आँगनवाड़ियों की मॉनिटरिंग के प्रति विशेष संवदेनशील रहें। आँगनवाड़ी संचालन एकीकृत बाल-विकास परियोजना की कोर सेवा है। कार्यशाला में बताया गया कि आँगनवाड़ियों की मॉनीटरिंग के लिये पर्यवेक्षकों को टेबलेट तथा डॉटापेक उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

कार्यशाला में बताया गया कि आँगनवाड़ी में दर्ज बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार तथा उन्हें शाला पूर्व शिक्षा उपलब्ध कराने के लिये आँगनवाड़ी दीदी का प्रावधान किया जा रहा है। आँगनवाड़ी क्षेत्र की बारहवीं उत्तीर्ण बालिकाओं को यह जिम्मेदारी दी जायेगी। कार्यशाला में लाड़ली लक्ष्मी योजना, शौर्या दल, वन स्टॉप सेन्टर, विशेष पोषण अभियान, लालिमा तथा पंचवटी से पोषण कार्यक्रम, राष्ट्रीय झूलाघर योजना और इन्टीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन स्कीम आदि योजनाओं के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की बिन्दुवार समीक्षा की गई। इस अवसर पर मोबाइल एप की कार्यप्रणाली का भी प्रदर्शन किया गया।

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