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नजीर बनी बिन बाप की लक्ष्मी
10-May-2015
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17 साल की बिना बाप की किषोरी लक्ष्मी समाज के लिए नजीर बन गई है। पिता के जाने के बाद जहां वह घर की बिगड़ी गाड़ी संभालने में मदद कर ही है वहीं खुद भी 10वीं में पढ़ रही है। वह अपने दो भाइयो एवं एक बहन को नियमित रुप से स्कूल भेजती है। मां के साथ चाय-समोसा के ठेले में भी मदद कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास द्वारा संचालित सबला योजना के जीवन कौषल के प्रषिक्षण ने लक्ष्मी की जिंदगी को आसान बनाया है।

सीधी के वार्ड-22 की निवासी लक्ष्मी गुप्ता तब कन्या विद्यालय की 8वीं में पढ रही थी। पिता मोहन लाल गुप्ता सोनांचल बस स्टैण्ड में ठेला लगाते थे। नशे की बुरी लत से मोहन की कमाई का कुछ हिस्सा ही घर तक पहुंचता था। माता सीता गुप्ता के अलावा लक्ष्मी से छोटा भीम व दो जुडवा भाई बहन दीपा व दीपक भी स्कूल जाने लगे थे। मौजूदा मंहगाई मे घर का खर्च जैसे तैसे चलता था और रोज गृहक्लेश बना रहता था।

नगर पालिका के आँगनवाड़ी केन्द्र वार्ड 22/2 मे सबला योजना अंतर्गत किशोरी बालिका की सूची में लक्ष्मी गुप्ता का नाम दर्ज था। कार्यकर्ता फेमिना बानो के साथ बाल विकास परियोजना सीधी क्र. 01 द्वारा आयोजित जीवन कौशल प्रशिक्षण शिविर मे आई एवं सखी के रूप मे प्रशिक्षण प्राप्त किया। इससे किशोरी लक्ष्मी के व्यवहार मे व्यापक बदलाव आया। पिता की नशे की लत से मां सीता झगडा करती तो लक्ष्मी, पिता को नशे से दूर रहने की समझाईस देती। होनी को कोई नहीं टाल सका। अंततः फरवरी 2012 में मोहन लाल की मृत्यु हो गई। परिवार की अजीविका का सहारा भी जाता रहा।

लक्ष्मी ने मां को बेसहारा नही होने दिया। मां सीता की मदद के लिये लक्ष्मी ने हाथ आगे बढाया। सोनांचल बस स्टैण्ड के सामने शाम को मां- बेटी मिलकर पिता के ठेले पर चाय-समोसा बेचने लगी। यही नही न सिर्फ उसने अपनी, बल्कि अपने भाई बहन की शिक्षा से लक्ष्मी ने समझौता नहीं किया। आज उसका 12 वर्षीय भाई भीम कक्षा 7 में तथा दीपा व दीपक चैथी कक्षा मे सरकारी स्कूल सीधी खुर्द मे पढ रहे हैं । सुबह घरेलू काम-काज के बाद वह पहले भाई बहन को स्कूल भेजती व फिर खुद नियमित रुप से कक्षा 10 मे कन्या विद्यालय जाती है, और शाम को ठेले पर मां का हाथ बटाती हैं।

लक्ष्मी कहती है पिता की नषे की लत के कारण नजदीकी रिश्तेदार पहले ही दूर हो गए थे। उनकी मौत के बाद हमारा परिवार अत्याधिक गरीबी की स्थिति में था। परिवार को खाने-पीने के संसाधन उपलब्ध नही थे, लेकिन सबला योजना के जीवन कौशल के प्रषिक्षण मे मुझे कुछ और बेहतर करने की प्रेरणा मिली। हमारे हक एवं जिम्मेदारियां एवं कुछ नया सोचे एवं नया करने की प्रेरणा ने मुझमे आत्मविश्वास पैदा किया मुझे फक्र है कि मै अपनी मां को समाज मे सम्मानपूर्वक जीवन यापन करने तथा अपने छोटे भाई बहनो को शिक्षित कर पा रही हूं।

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